Friday, October 15, 2010

वो मेरे दिल तक पहुच ही जाते है

क्यों चलते कदम मेरे रुक से जाते, जब भी वो खयालों में आते है,
क्यों थम जाती है धड़कन, जब वो अपनी जुल्फों कों होटों से दबाते है,
क्यों महक जाती है फिज़ा, जब वो मुझे देख अपना दुपट्टा लहराते है,
क्यों भूल जाता हु में सांस लेना, जब वो अपनी उंगलियों से मेरी हथेली पर अपना नाम लिख जाती है,
कभी ख्वाब बन कर, कभी ख्वाइश बन कर,
कभी याद बन कर, कभी सांस बन कर,
वो मेरे दिल तक पहुच ही जाते है

1 comment:

vandana gupta said...

बेहद सुन्दर भाव्।