Tuesday, September 16, 2008

निशा नही रहता ....


मंजिलो की किसे है परवाह,
कोई कारवा सदा नही रहता

ख्वैशो से क्या करे तमन्ना ,
अरमानो की कोई इन्तेहा नही होती

बदलते है रिश्ते हर मोड़ पर,
और कोई रास्ता हमेशा नही रहता

क्यो रोते हो देख कर पैरो के चाले,
किसी घाव का निशा सदा नही रहता

हर पल करवट लेती है कुदरत,
एक वक्त के बाद इंसान का भी निशा नही रहता


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