मंजिलो की किसे है परवाह,
कोई कारवा सदा नही रहता ।
ख्वैशो से क्या करे तमन्ना ,
अरमानो की कोई इन्तेहा नही होती ।
बदलते है रिश्ते हर मोड़ पर,
और कोई रास्ता हमेशा नही रहता ।
क्यो रोते हो देख कर पैरो के चाले,
किसी घाव का निशा सदा नही रहता ।
हर पल करवट लेती है कुदरत,
एक वक्त के बाद इंसान का भी निशा नही रहता ।
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