Monday, September 15, 2008

दिल के रिश्ते .....

नही समझता यहाँ कोई दिल के रिश्तो को,
यहाँ सिर्फ़ रिश्तो की नुमाइश होती है,
लगती है हर जज़्बात की बोली,
जिसकी कीमत सिर्फ़ आसुयो से अदा होती है

1 comment:

Unknown said...

Tumhara khoi jab nahi Mr Anuj............. I like admire your kavita's.