Monday, May 24, 2010

काश ........

क्यों हर चाहत को उसका मुकाम नहीं मिलता,
साँसे तो चलती है पर धड़कन का पता नहीं चलता,

कभी रखा होता उसने मेरे सीने पर सर,
काश कभी उसने मेरी हर धड़कन पर नाम अपना सुना होता,

मेरे हाथो में आज भी उसकी हथेली की हरकत है,
काश कभी उसने भी मेरी हथेली को इतनी शिदत से थामा होता,

ना गुज़रता है कोई पल हमारा उसके बिन,
काश कभी उसने भी किस्सी पल नाम हमारा पुकारा होता,

गुज़ारे है जाने कितने पल हमने साथ उसके,
काश कभी उसका भी कोई पल हमारा होता,

जलते रहे हम रात दिन उससे सोच कर,
काश कभी हमने उसकी चाहत को दिल में लाया ना होता,

उससे दिए हर आंसू का हिसाब चूका रहे है ज़िन्दगी वीरान कर,
काश हमने कभी उसे कोई आंसू रुलाया ना होता,

ना कर पता कोई मुझे उससे जुदा,
काश कभी किसी अजनबी को अपने रिश्ते के बीच लाया ना होता,

जिस पर किया यकीन वो हर रिश्ता झूठा निकला,
काश कभी उसने मुझे यकीन करना सीखाया ना होता,

काश खुदा ने मुझे इश्क करना सिखाया ना होता,
काश वो मेरी ज़िन्दगी में आया ना होता,
काश खुशियों से मेरा रिश्ता इतना पराया ना होता....

काश ....काश .....काश....

काश खुदा ने उससे मेरा खुदा बनाया ना होता..



1 comment:

khushbu said...

really forbidden memories...