क्यों देखू में ख्वाब,
की खवाबो की हकीक़त से कोई पहचान नहीं होती,
जो होती पहचान तो ज़िन्दगी यु वीरान नहीं होती,
ना कोई खवाब अधुरा रहता, कोई गम-इ-शाम न होती,
क्यों देखू में ख्वाब,
जब उसके पूरा होने की मुझे कोई उम्मीद ही नहीं,
किसी उम्मीद से रही कभी मेरी पहचान भी नहीं,
क्यों सुख गए मेरी आखो के आंसू,
कोई मर गया हर दर्द का एहसास,
क्यों अब कोई ख्वाब मेरी आखो में नहीं,
क्यों कोई ख्वाब मेरी आखो में सजता ही नहीं,
क्यों .... क्यों ..... क्यों.....
की खवाबो की हकीक़त से कोई पहचान नहीं होती,
जो होती पहचान तो ज़िन्दगी यु वीरान नहीं होती,
ना कोई खवाब अधुरा रहता, कोई गम-इ-शाम न होती,
क्यों देखू में ख्वाब,
जब उसके पूरा होने की मुझे कोई उम्मीद ही नहीं,
किसी उम्मीद से रही कभी मेरी पहचान भी नहीं,
क्यों सुख गए मेरी आखो के आंसू,
कोई मर गया हर दर्द का एहसास,
क्यों अब कोई ख्वाब मेरी आखो में नहीं,
क्यों कोई ख्वाब मेरी आखो में सजता ही नहीं,
क्यों .... क्यों ..... क्यों.....
1 comment:
thts something very true...
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